ये एक बेमानी सी बहस है लेकिन ये उस समय की बात है जब शायद मुझे कला और कलाकारों की पहचान नहीं थी।परिवार में सबकी अपनी अपनी पसंद होती है और मुझे किशोर कुमार की आवाज़ मोहम्मद रफ़ी से ज़्यादा पसंद थी। तो इसको लेकर बहस छिड़ गई और दोनों पक्ष अपने अपने गायक के गानों की लिस्ट लेकर सुनाने लगे। दोनों ही गायक लाजवाब और उनके गाये हुये गीत भी। लेकिन मुझे किशोर कुमार ज़्यादा पसंद हैं और इसमें मैं कुछ श्रेय उन गीतकारों को भी देता हूँ क्योंकि गाने के बोल ही कहीं न कहीं आपको छू जाते हैं और आपके सिस्टम का एक हिस्सा बन जाते हैं। आज जब बहुत दिनों बाद लिखने का मन हुआ तो किशोर दा की याद आ गयी। आज उनका जन्मदिन है तो इससे अच्छी और क्या बात हो सकती से वापस लिखना शुरू करने के लिये।
मौसम प्यार का
कुछ गाने होते हैं जो आपको अपने साथ ले जाते हैं या यूं कहें की आप बह जाते हैं। ये उनमें से एक गाना है। आर डी बर्मन, मजरूह सुल्तानपुरी और किशोर कुमार ने पर्दे के पीछे से प्यार से भरे हुये ये गाने को पर्दे पर बख़ूबी से निभाया ऋषि कपूर और पूनम ढिल्लों ने। जब पिछले दिनों पूनम जी से एयरपोर्ट पर मुलाक़ात हुई तो ये गाना ही याद आ गया था।
मेरी भीगी भीगी सी
संजीव कुमार और जया भादुड़ी की ये फ़िल्म दूरदर्शन पर देखी थी। गाने की समझ बहुत बाद में आई। मजरूह सुल्तानपुरी साहब, आर डी बर्मन और किशोर दा।
आये तुम याद मुझे
कई यादें हैं इस गाने के साथ। आज भी रात में ये गाना सुन कर एक सुकून से मिलता है। फ़िल्म में अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी के बीच चल रही उधेड़बुन इस गाने में दिखती है। इसी फिल्म का बडी सूनी सूनी है भी किशोर कुमार का एक बेहतरीन गानों में से एक है।
मेरे महबूब क़यामत होगी
ये भी दूरदर्शन पर देखी फ़िल्म से याद है। एक बहुत ही उम्दा गाना जिसके बोल हैं आनंद बक्शी और संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी का
हर कोई चाहता है
इस गाने के दो भाग हैं। एक खुशी वाला जिसमें ये जीवन का फ़लसफ़ा हल्के अंदाज़ में है और दूसरा थोड़ा संजीदा तरीके का है। दोनों के माने एक ही हैं बस कहने का अंदाज़ अलग है और क्या खूबसूरती से गाया है किशोर कुमार ने मदन मोहन की इस धुन को। बोल हैं
ज़िन्दगी आ रहा हूँ मैं
बहुत ही आशावादी गाना जिसके बोल लिखे हैं जावेद अख्तर साहब ने और संगीत है हृदिय्नाथ मंगेशकर जी का
ज़िन्दगी के सफ़र में
ज़िन्दगी का फलसफा जिसे लिखा आनंद बक्शी साहब ने और जिसे अमर बना दिया किशोर दा की आवाज़ नें
मुसाफ़िर हूँ यारों ना घर है ना ठिकाना
गुलज़ार साहब का लिखा गीत और एक बार फ़िर आर डी बर्मन और किशोर दा साथ में।
मुझे आज भी आश्चर्य होता है की किशोर कुमार मुम्बई एक हीरो बनने आये थे लेकिन वो गायक बन गये। अगर सच में उन्हें हीरो ही बनने का मौका मिलता जाता तो क्या हम इस आवाज़ से मेहरूम हो जाते। बिना किसी तालीम के उन्होंने ऐसे ऐसे गाने गाए हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलते जा रहे हैं। इसका उदाहरण आप स्पॉटीफाई के विज्ञापन में देख सकते हैं।
Beautiful songs. Our choice is similar. So I have most of his songs in my collection.